महाशिवरात्रि का त्यौहार - Mahashivratri ka tyohar


भारत में हर साल अनेक त्यौहार मनाये जाते है। हर त्यौहार का एक अलग महत्व और एक अलग पहचान होती है। भारत में हर धरम के लोग  सारे त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाते है इसिलए हमारे भारत को अद्भुद भारत कहा जाता है।  हमारा भारत देवताओं की एक उत्पत्ति भूमि है। भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, भारत में 33 करोड़ देवी देवता हैं। इसलिए भारत एक बहुत बड़ी संस्कृति है और एक वर्ष में कई त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं त्योहारों में से एक त्यौहार हमारे भोले नाथ शिव शंकर का भी है जैसे हम महाशिवरात्रि कहते है। महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के उत्सवों की सूची में सबसे महत्वपूर्ण है।

हर साल की तरह इस साल भी महाशिवरात्रि बड़े धूमधाम से मनाई जायगी ।  इस साल हिन्दू कैलेंडर  के अनुसार महा शिवरात्रि 11 मार्च  को मनाई जायगी।



              

 

 

 

महाशिवरात्रि का महत्व - Importance of  Mahashivratri

 

हिन्दू समाज में महाशिवरात्रि का बहुत बड़ा महत्व है । महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो  पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। 

महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं। परंतु, साधकों के लिए, यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे।  मान्यता है कि महाशिवरात्रि को शिवजी के साथ शक्ति की शादी हुई थी। इसी दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। शिव जो वैरागी थी, वह गृहस्थ बन गए। माना जाता है कि शिवरात्रि के 15 दिन पश्चात होली का त्योहार मनाने के पीछे एक कारण यह भी है।

 

 

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि -  Why celebrate Mahashivratri

 

भारत  में हर साल महशिवरात्रि बड़े धूम धाम से मनाई जाती है पर बहुत कम लोग जानते है के हम महाशिवरात्रि क्यों मानते है ।  तो चलिए आज हम आपको बतात्ते है की   हम महा शिवरात्रि क्यों  मानते  है ।  

प्राचीन काल में महाशिवरात्रि को मानाने के अलग अलग कारण और  मान्यता है ।  एक पौराणिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिव जी पहली बार प्रकट हुए थे, लोग जे भी मानते है के शिव जी अग्नि  ज्योतिर्लिंग  के रूप में प्रकट हु थे, जिसका न आदि था और न ही अंत. ।  प्राचीन कथा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भन्नि 12 जगहों पर शिवलिंग उत्पन्न हुए थे जिन्हे आज भी भारत में 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम से जाना जाता है  

 एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही विभन्नि 64 जगहों पर शिवलिंग उत्पन्न हुए थे. हालांकि 64 में से केवल 12 ज्योतिर्लिंगों  के बारे में जानकारी उपलब्ध. इन्हें 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम से जाना जाता है  हमारे सनातन धर्म में 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन है।

12  ज्योतिर्लिंग  के बारे में  जानने के लिए जहा क्लिक करे -

भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार शिवरात्रि उस दिन मनाई जाती है जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से निकले विष को पीकर दुनिया को बचाया था। यह जहर उनके गले में जमा हो गया और इस तरह नीला हो गया, यही कारण है कि भगवान शिव को नीलकंठ (नीले गले) के रूप में भी जाना जाता है।

 


 महाशिवरात्रि के दिन क्या करते है शिवभगत - How shivbhagat celebrate mahashivratri 


महा शिवरात्रि, पवित्र रात भगवान शिव की पूजा करने के लिए समर्पित है। लोग महा शिवरात्रि का व्रत, उपवास रखते हैं और घरों और मंदिरों में पूजा करते हैं । मंदिरो में हवन और जग किये जाते है भोलेनाथ को खुश करने के लिए मंदिरो  में शिव भोज बनाया जाता है । इस दिन शिव भगत पुरे रात शिवलिंग की पूजा करते है और  बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा आदि से शिव जी का अभिषेक किया जाता है। 

 हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जगत में रहते हुए मुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है महाशिवरात्रि। इस व्रत को रखने से साधक के सभी दुखों, पीड़ाओं का अंत तो होता ही है साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है।


हम शिवरात्रि व्रत पर क्या खा सकते हैं -   What can we eat on shivratri fast?


यदि आप इस वर्ष शिवरात्रि के व्रत का पालन करने की योजना बना रहे हैं तो यहां कुछ खाद्य पदार्थ हैं जो आप कभी भी उपवास पर खा सकते हैं।

•  आलू: आलू कडी, आलू टिक्की, आलू खिचड़ी

•  दूध आधारित पेय पदार्थ 

• गैर अनाज व्यंजन

• पकौड़े और वड़े

•  फल और ड्राई फ्रूट्स



उम्मीद करते है की artical महाशिवरात्रि का त्यौहार  आपको पसंद आया होगा। आप सबको और आपके परिवार को हमारी हिंदी शब्द ब्लॉग की तरफ से happy mahashivratri


jai hind,

 

 

 

 

 

 


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