बसंत पंचमी का त्योहार - Basant panchami in hindi

हिंदू धर्म में एक वर्ष में कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। हर त्योहार का अलग महत्व और उत्सव का अलग तरीका होता है। भारतीय संस्कृति में लोग त्यौहारों को एक साथ मनाते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह किस धर्म से है और चाहे अमीर या गरीब हो ।  भारत में हार साल अनेक त्यौहार मनाये जाते है।  भारत में हर धरम के लोग  सारे त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाते है इसिलए हमारे भारत को अद्भुद भारत कहा जाता है

हमारा भारत देवताओं की एक उत्पत्ति भूमि है। भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, भारत में 33 करोड़ देवी देवता हैं। इसलिए भारत एक बहुत बड़ी संस्कृति है । तो भारत में प्रसिद्ध त्योहारों में से एक " बसंत पंचमी  का त्योहार  " है ।  इस वर्ष वसंत पंचमी का त्योहार 16 फरवरी दिन मंगलवार को  है।


 


    

हिन्दी पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि जनमानस में वसंत पंचमी के नाम से लोकप्रिय है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्ञान और वाणी की देवी मां सरस्वती माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही ब्रह्माजी के मुख से प्रकट हुई थीं। इस वजह से ही वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आराधना करने से माता सरस्वती जल्द ही प्रसन्न होती हैं। बसंत पंचमी की तिथि का हिंदू परंपरा में बेहद विशिष्ट स्थान है. माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस तिथि का विशेष महत्व इसलिए भी हो जाता है क्योंकि, ऋतुराज बसंत की शुरुआत इसी दिन से होती हैं।


कैसे मनाया जाता है बसंत पंचमी  का त्योहार 

हिंदू परंपरा में बसंत पंचमी के दिन, मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना की जाती है जिसके पश्चात अगले दिन उसी प्रतिमा का पूरे विधि-विधान अनुसार विसर्जन कर दिया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीला वस्त्र धारण करने, हल्दी से मां सरस्वती की पूजा करने और उस हल्दी का तिलक लगाने की भी परंपरा है। माना गया है कि ऐसा करने से मां सरस्वती की अपार कृपा प्राप्त होती है.

वसंत पंचमी के दिन व्यक्ति को स्नान आदि से निवृत होने के बाद पीले या श्वेत वस्त्र धारण करना चाहिए। मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा करने के दौरान उनको पीले पुष्प, पीले रंग की मिठाई या खीर जरूर अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा उनको केसर या पीले चंदन का टीका लगाएं। पीले वस्त्र भेंट करें।

 

बसंत पंचमी  का त्योहार पर पीले रंग का महत्व

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से ठंड के मौसम का समापन होने के साथ ही, वसंत ऋतु का आगमन हो जाता है. इसी समय से वातावरण बेहद सुन्दर रूप धारण करने लगता है, जिससे पेड़ों पर नई-नई पत्तियां खिलने लगती है. वहीं इस दौरान देश के कई राज्यों में सरसों की फसलों की वजह से भी, धरती का रंग पीला नजर आने लगता है।


बसंत पंचमी के विभिन्न रूप

-बसंत पंचमी के दिन पवित्र नदियों, घाटों और तलाबों के तट पर भारी भीड़ उमड़ती है और लोग नदी में स्नान के पश्चात ही मां सरस्वती की पूजा करते हैं।

-पंजाब, हरियाणा, हिमाचल के लोग बड़ी संख्या में इस पावन दिन पर हिमाचल प्रदेश के गर्म पानी के स्त्रोत तातापानी में इकट्ठे होते हैं और वहां के सल्फर युक्त गर्म पानी में स्नान करते हैं।

-पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा में भी लोग ढाक की थापों के बीच बसंत पंचमी का त्योहार उत्साह के साथ मनाते हैं।


हम उम्मीद करते है के आपको बसंत पंचमी  का त्योहार in Hindi के बारे में जानकारी मिली होगी अगर अच्छा लगा तोह कृपा आगे अपने मित्रो साथिओ के साथ साँझा करे ।

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