जानिए आखिर रामायण के बाद क्या हुआ

आप सब लोग रामायण के बारे तोह अच्छे से ही जानते होंगे परन्तु ज़्यादातर लोगो को यह नहि पता के रामायण के बाद क्या हुआ, हम आज इस लेख के जरिये यही जानकारी देंगे के आखिर रामायण के बाद हुआ क्या। रामायण के बाद का इतिहास बताने से पहले हम आपको सबसे पहले रामायण के बारे में कुज बताते है जैसे के रामायण क्या है।

ramayan ke baad kya hua
Ram Parivaar Picture source social media


रामायण की सारी कहानी भगवान् राम को समर्पित है जिसमे निष्कर्ष यही निकलता है के बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत हमेशा होती है इसी के ऊपर रामायण है। रामायण महारिषि वाल्मीकि और तुलसीदास महाराज जी ने लिखी है। इसमें भगवान् राम के जनम से लेकर विवाह और बाद में वनवास के काटे 14 वर्षो का ज़िकर है। इसमें विस्तार से राम और रावण के युद्ध का ज़िकर भी मिलता है। अक्सर लोग यही जानते है के रामायण भगवान् राम के वनवास और रावण से युद्ध के बाद वापिस अयोध्या आ के अपना राज संभाल लिया। बाद में भगवान् राम का विष्णु अवतार में वापिस देव लोक लौट जाना तक ही है। रामानन्द की रामायण राम और लक्मण जी के नदी में समां जाने के बाद राम के विष्णु रूप में चले जाने तक ही सिमित है। लेकिन कभी किसी के ज़ेहन में यह बात आयी के रामायण के बाद क्या हुआ  होगा तोह चलिए हम आपको कुज बहुत ही ख़ास तथ्य के बारे में बताते है।

रामायण के पूर्ण वंशज

आप के दिमाग में जाहि चल रहा होगा अब के रामायण के बाद सूर्यवंश का और लव कुश का क्या हुआ होगा, और क्या आज भी भगवान् राम के वंश से कोई धरती पर ज़िंदा है जा सूर्यवंश अब भी चल रहा है तो आपके इसी सवालो का हमने कुज जानकारी इकठी करके यहाँ बताने की कोशिश की है। 

गुरु ब्रह्मा जी के 10 पुत्र थे जिसमे से इक पुत्र से उनके आगे सूर्यवंश चला और आगे उन्ही के वंश में भगवान् राम जी ने जनम लिया था। सूर्यवंश के पहले राजा इस्वांक थे और इसलिए सूर्यवंश को इससवानकु वंसज भी कहा जाता है। इसी वंश में महा योद्धा भगीरथ भी पैदा हुए, भगीरथ राजा वह थे जिन्होंने माँ गंगा को पृथ्वी पर उतारा था। भगीरथ के पुत्रो से आगे इक राजा रघु भी पैदा हुए और राजा रघु बहुत ही कुशल और तेजस्वी थे, जिसके कारन इस वंश को रघुकुल भी कहा जाने लगा। 

आगे रघुकुल बढ़ता गया और उनमे से राजा अजय से राजा दशरथ पैदा हुए फिर दशरथ से तो सबको पता ही है 4 पुत्र राम ,लश्मण ,भरत और शत्रुघ्न हुए। राम सूर्यवंश के 63वे राजा थे, राम से 2 पुत्र हुए लव और कुश। ऐसे ही लक्मण भरत सत्रुघन के भी 2 -2 पुत्र हुए। 

रामायण के बाद क्या हुआ

रामायण के बाद अयोध्या का साम्राज्य के बाद चारो भाईओ के पुत्रो ने अपने अपने साम्राज्य विकसित कर लिए जैसे की भरत के पुत्तरो ने तक्षिला जीत कर वह पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया और यह तक्षिला वही है जिसमे महा बुद्धिजीवी चाणकय भी रह चुके है। ऐसे ही लक्मण के पुत्र और सत्रुघन के पुतरो में से कुज हिमालय, गोरखपुर , मथुरा आदि में साम्राज्य स्थापित कर गए। राम के पुत्र लव ने लवनगरी बसाई जो की आजकल पाकिस्तान में लाहौर के नाम से जनि जाती है। लाहौर में आज भी राजा लव द्वारा बनाये  मंदिर मिलते है। लव के वंसज बाद में कहा जाता है के गुजरात की और कूच कर गए और वहा से राजस्थान के मेवाड़ में बस गए। 

मेवाड़ में लव के वन्सजो ने सिसोदिया वंश की स्थापना करि और बाद में उनके सुपुत्रों से आगे गुर्जर गेहलोत आदि वंश भी हौंद में आये। राजा कुश ने कुश्वति नाम राज की स्थापना बिलासपुर के पास (छत्तीसगढ़) करी। यह भी कहा जाता है के कुश के वन्सजो ने आगे पूर्व के नागो के राजा से सम्बन्ध बनाये और यह वंश पूर्व की और भी फ़ैल गया, आज इस जगह को थाईलैंड के नाम से जाना जाता है और Thailand में आज भी वहा के कुज राजसी लोग अपने आप को राम के वंश मान कर पूजा करते है। 

कुश की मृत्यु किसी दैत्य के हाथो हुई और कुशवाहा वंश भी राजा कुश से ही निकला है। बहुत सारे इतिहासकारो के अनुसार लव का वंश आगे नहीं चला और केवल कुश का ही वंस आगे तक चला। कुश के पुत्रो से आगे चल के महाभारत तक राजा बृहदबल तक पीढ़ी पहुंच गयी। बृहदबल कौरवो की तरफ से महाभारत में लड़े थे और अभिमन्यु के हाथो मारे गए। 

कहा जाता है के गौतम बुद्धा भी कुश के वंश में से थे। हाल ही में 2020 में अयोध्या श्री राम भूमि का केस जीत लिया गया और राम मंदिर का निर्माण की सुरुवात हो चुकी है। इसी दौरान बहुत लोगो ने दावा किया के वह राम के वन्सजो में से है। इसी में से जयपुर के राजपरिवार से तलूक रखती दिया कुमारी भी कुश के पीढ़ी से निकली। श्री दिया कुमारी जी ने बहुत से ऐसे दस्तावेज पेश किये जो के साफ़ साफ़ ब्यान करते है के राजा राम उनके पूर्वज थे। दस्तावेजों के अनुसार राम की सारी पीढ़ी का वर्णन मिलता है, इस सब सबूतों से सिद्ध हो जाता है के रामायण के बाद क्या हुआ जा राम राज और रघुकुल के बाद क्या हुआ । दिया कुमारी ने पतरकारों से हुई वार्तालाप में बताया के वह बहुत मान महसूस करती है के वह श्री राम के वन्सजो में से इक है। इसी तरह भगवान् विष्णु अवतार श्री राम जी के उत्तरादिकारी संसार में बहुत जगह मौजूद है। 

रामायण के बाद हनुमान का क्या हुआ 

हनुमान जी भगवान् शिव का रूद्र अवतार थे और वह बहुत ही शक्तिशाली थे, हनुमान की सहायता से राम जी ने लंका पर जीत प्रपात करी थी। हनुमान का ज़िकर रामायण में सबने सुना होगा की वह रामजी के बहुत बड़े भगत थे और उन्होंने लंका को आग लगा दी थी।  वह पूरी रामायण में राम जी के साथ साया बन के रहे। लेकिन रामायण के बाद हनुमान का क्या हुआ इसके बारे में कुज लोगो को नहीं पता होगा।    

रामायण के बाद हनुमान का ज़िकर महाभारत में मिलता है, इक बार भीम को अपने ताकतवर होने का बहुत घमंड हो गया फिर क्या इक बार भीम जंगल के रस्ते जा रहा था तो वहा बीच रस्ते में इक वानर मिला जिसको भीम ने बुरा बला कह के हटने को बोलै। वानर रूप हनुमान जी ने भीम को बोलै के वह खुद उनको रास्ते से हटा दे तोह वह हट जायेगा। भीम के काफी प्रयास करने के बावजूद भी वह वानर को हिला तक नहीं पाया और बोलै के आप कोई आम वानर नहीं है तोह हनुमान की ने अपना असली रूप दिखाया और उसके साहमने हनुमान रूप में प्रकट हो गए जिससे भीम का घमंड टूट गया। 

हनुमान जी को अमर जीवन का वर प्रापात था और इसी वजह से वह कलयुग तक सृस्टि में मौजूद है, यह तोह नहीं पता के वह इस सृस्टि में कहा है लेकिन इतना जरूर कहा जाता है के हनुमान जी राम के भगत होने के कारन यहाँ राम भगत हो वहा मौजूद रहते है।  7 वी सदी में हनुमान जी को तुलसीदास ने देखा था और उनके कहने पर तुलसीदास जी ने रामायण की हिंदी शब्दों में रचना की।


तोह दोस्तों आज हमने रामायण के बाद क्या हुआ लेख में राम के पूर्वज और वंश के बारे में जानकारी दी जिसमे हमने सब जानकारी इंटरनेट और कुज और जानकारी के सूत्रों से इकठा करी और उसपे लेख लिख के आपको सामगरी प्रधान करी। हम उम्मीद करते है आपको हमारा यह लेख रामायण के बाद अयोध्या का क्या हुआ पसंद आया होगा और आप राम भगत के साथ इसको साँझा करेंगे। जय श्री राम 

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