भारत की सबसे कठिन श्री खंड महादेव यात्रा - Bhasmasur aur shrikhand yatra ka ithihas in hindi

भारत में बहुत सी यात्राएं हैं और हर यात्रा का लगपग कुज न कुज इतिहास जुड़ा ही है। जैसे हिन्दू धरम में महादेव को लेकर बहुत यात्रा है जिसको हर साल किसी ख़ास अवसर में खोला जाता है। ऐसी ही यात्राओं में से इक यात्रा है श्री खंड महादेव की यात्रा जो की भारत की सबसे कठिन यात्रा में से इक है। कुज यात्रिओ अनुसार यह भारत की सबसे कठिन Yatra है। 

shri khand mahadev yatra in hindi


श्री खंड महादेव यात्रा क्या है 

बाकी यात्राओं की ही तरह यह भी हिन्दू धरम में बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह यात्रा भगवान् महादेव को समर्पित है इसलिए इसको महादेव श्रीखंड कहा जाता है। यह यात्रा कठिन होने के साथ साथ बहुत ही Historical Holy Journey भी है, इसका इतिहास भगवान् महादेव की इक कहानी से जुड़ा हुआ है। इस Journey की लेकर इक बहुत ही अध्भुत्त कहानी है।


श्री खंड महादेव की पौराणिक कथा और इतिहास 

हिन्दू धरम के अनुसार इक बार भस्मासुर नाम के इक और ने भगवान् महादेव की सालो भर तपस्या करके महादेव से इक वर प्राप्त कर लिया था। भस्मासुर ने भोलेनाथ से वर माँगा की उसको इक ऐसी शक्ति दे जिससे वह जब किसी के सर पर हाथ रखे वह तुरंत ही भसम हो जाये जानी की उसके किसी बी मानव जंतु वास्तु पैर हाथ रखने से वह जल कर राख हो जाये। भस्मासुर ने भोलेनाथ को प्रसन करकिया था इसलिए शिव जी ने उसको यह वर दे दिया।

इस वर को दे के सवयं महादेव ही फस्स गए थे। क्यूंकि वर पाने के बाद भस्मासुर अपने आप को घमंड में सबसे शक्तिशाली मानने लगा और वर का दुरप्रयोग करते हुए महादेव को ही भसम करने के लिए उनके पीछे पढ़ गया।

यह देवलोक में इक बहुत ही संकट बन गया था। ऐसा मन जाता है की जब भस्मासुर भोलेनाथ के पीछे उनको भसम करने के लिए पड़ा था तब भोलेनाथ ने अपने आप को इक गुफा में छुपा लिया।

भगवान शिव ने ऐसे समय में भगवान् विष्णु का समरण किया उसके बाद विष्णु जी ने इस दुविद्या का निवारण करने के लिए इक इस्त्री का रूप धारण किया। विष्णु जी ने MOHINI नाम इक नुरीतिका जो देखने में बहुत सुन्दर थी का रूप लिया। मोहिनी ने भस्मासुर को मोह लिया फिर क्या था भस्मासुर सब भूल कर मोहिनी के पीछे लग गया और उसे शादी के लिए बोला। 

मोहिनी ने भस्मासुर को बताया की वह इक नृतिकी है और वह इक नृतिकी से ही शादी करेगी। भस्मासुर को नृतिक का ज्ञान न होने के बावजूद भी उसने मोहिनी को बोल दिया की वह भी नृतिक बन जायेगा, फिर क्या था मोहिनी ने भस्मासुर को नृतिक करने को कहा और बोला को जैसे जैसे मई नृतिक करुँगी tum भी वैसे ही करना।

मोहिनी ने नृतिक करते करते इक ऐसी मुद्रा बनायीं जिसमे नृतिक को अपने सर पर हाथ रखना था ऐसे में भस्मासुर मोहिनी को देखते देखते उसकी तरह नृतिक करते करते यह भूल गया की उसको वरदान प्रपात है जिस कारन वह अपने सर को नहीं हाथ लगाएगा पर वह सुन्दर मोहिनी के चक्कर में सब भूल कर मोहिनी की तरह सर पर हाथ रख कर मुद्रा बनाने लगा। जैसे ही उसने अपने सर पर हाथ रखा तुरंत वह भसम हो गया और जल कर राख बन गया। तोह इस तरह विष्णु जी ने शिव जी और सारे संसार को भस्मासुर जैसे दानव से बचाया। 

भस्मासुर के मरने के बाद शिव जी गुफा में फस्स गए थे और देवताओं के प्रयास करने के बाद भी वह वह से निकल नहीं पा रहे थे। ऐसे में भगवान् शिव ने अपने आप को इक ताकतवार शक्ति के रूप में ढाल के गुफा से बहार निकला और मन जाता ही के शिव जी के शक्ति रूप से बहार आने से गुफा में धमाका हुआ। इस धमाके से सब कुज नष्ट हो गया और इक शिवलिंग रूप का पत्थर बच गया जिसको आज भकत शिवलिंग के रूप में पूजते है।


श्री खंड महादेव यात्रा कहा है 

यह यात्रा हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में स्थित है। इसके सबसे नजदीक बस स्टेशन रामपुर बुशर है जो Shimla के ऊपर पड़ता है।


यात्रा कब खुलती है 

यह कठिन मार्ग की यात्रा गरमी के जुलाई अगस्त महीने में साल में इक बार खुलती है। बहुत कठिन होने के कारन आप इस यात्रा को इक रोमांचक और साहसी Yatra के रूप में कर सकते है। Adventure के दीवाने  लोग इसको इक ट्रेक के Roop में भी देखते है। यह यात्रा इतनी Kathin है के 18 years से kam और 60  साल से ज़्यादा उम्र वाले लोग नहीं कर सकते। इस यात्रा को सुरु करने से पहले हर यात्री का इक मेडिकल टेस्ट किया जाता है। अगर इंसान मेडिकल फिर होंतोह ही उसको इक Taugh Journey की करने की अनुमति दी जाती है। 


तोह आप भी इस श्री खंड महादेव की यात्रा को करके अपनी मनोकामना पूरी कर सकते और साथ ही इस एडवेंचर से भरपूर इस यात्रा का लुतफ उठा सकते है।

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1 Comments

  1. बहुत अच्छी जानकारी के साथ यात्रा वृतांत पढ़कर शिवजी की कृपा का लाभ मिला ,धन्यवाद!

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