बाबे नानक दा विआह बटाला - Jor Mela Gurudwara Kandh Sahib

भारत में बहुत सारे धर्मो के चलते बहुत ऐसे त्यौहार और उत्सव है जिसका कुज लोगो को ज्ञान ही नहीं है। आज हम आपको यहाँ बाबे नानक दा विआह बटाला जनि की गुरु नानक देव जी के शादी के बारे में जानकारी देंगे। बहुत लोगो को श्री गुरु नानक देव जी के बारे में पता है और लगपग सब जाती धर्मो के लोग जानते है, के गुरु नानक देव जी सिख धरम के पहले गुरु थे। आप सब जानते है के गुरु नानक देव जी ने समाज में फैली हुई बहुत सी कुरीतिओ का खंडन किया था और इसके चलते बहुत सारे धर्मो के लोग उनकी शरण में आ गए थे। यहाँ हम आपको बाबे दा विआह गुरु नानक देव जी के शादी के उत्सव के बारे बतायेगे के कैसे सिख धरम के लोग आज भी गुरु नानक साहिब जी के शादी वाले दिन को त्यौहार के तरह बहुत धूमधाम से मनाते है। 

babe da viah batala

बाबे नानक दा विआह बटाला क्या है 

बाबे नानक दा विआह  इक पंजाबी शब्द है जिसका मतलब है जी गुरु नानक देव जी की शादी और इक उत्सव को पंजाब में हर वर्ष मेले में रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।  इस मेले में सिख धरम के साथ बाकी धरम के लोग भी शामिल होते है।

यह त्यौहार गुरु जी के शादी के दिन की याद में अभी भी पूरी सिख भाईचारे में मेले के रूप में मनाया जाता हैं। यह मेला पंजाब के जिला गुरदासपुर के इक शहर बटाला में मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी के बारे मे सब जानते है क्यूंकि बचपन में सबने उनके ऊपर किताबो में पढ़ा ही होगा, गुरु जी का विवाह बटाला निवासी माता सुक्खनी देवी जी से हुआ था इसलिए हर वर्ष बटाला में गुरु जी की शादी का उत्सव मनाया जाता है और इसी को पंजाबी भाषा में बाबे नानक दा विआह कहा जाता है।

बाबे दा विआह 2020  में कब है 

इस बार 2020  में गुरु नानक जी की शादी का त्यौहार ka मेला 25  अगस्त को है। इसको जोर मेला गुरुद्वारा कंध साहिब बटाला भी कहा जाता है।

जोर मेला बटाला कैसे मनाया जाता है 

यह त्यौहार भी बाकी त्योहारों की तरह ही बहुत शांति पूर्वक और हर्षो उल्लाश से मनाया जाता है। इस वार्षिक मेले में पंजाब के शहर बटाला में बहुत सजावट करी जाती है और पूरे शहर को गुरु के रंग में ढाल दिया जाता है। इस दिन हर जगह शहर में मेले का ही माहोल होता है। येह 3  दिन तक मेला लगता है जिसमे पूरे रीती रिवाज़ के अनुसार विवाह समारोह को मनाया जाता है जानिए  कैसे  पूरे शहर में यह मेला कैसे मनाया जाता है।

  • शबील 
शबील पंजाब में वैसे तोह हर वर्ष गुरु साहिबान की सहिदी दिवस में रूप में और कुज जगह गर्मी से राहत के लिए लगाई जाती है। शबील में रास्ते से गुजरने वालो राहगीरों को ठंडा मीठा पानी का शरबत पिलाया जाता है। ऐसे ही इस मेले वाले दिन भी पूरे बटाला शहर में हर जगह जगह पर आपको शबील देखने को मिल जाएगी और आप इस शबील का आनंद ले सकते है।

  • नाच गाना 
इस मेले की ख़ुशी को दिखाने के लिए पूरे शहर में बाबे दे विआह वाले दिन जगह जगह TENT लगा के लोग नाच गाने  का समारोह करते है जिसमे ज़्यादातर शब्द कीर्तन का गान किया जाता है उस ओर पंजाबी लोग खुसी से भंगड़ा करते है।

  • नगर कीर्तन 
मेले से ठीक इक दिन पहले पूरे शहर में सिख प्रम्परा के अनुसार से  नगर कीर्तन निकाला जाता है। इस नगर कीर्तन में बहुत शर्दालु हिस्सा लेते हैं। इस नगर कीर्तन को शोभा यात्रा और पंजाबी में पालकी भी कहा जाता है। इस पालकी मे श्रि गुरु ग्रन्थ साहिब जी को फूलों वाली गाडी में रख के पूरे शहर का चक्कर कटा जाता है। इस नगर कीर्तन में सिख संस्कृति से सबंदित बहुत चीज़े देखने को मिल्ती है जैसे की गतका  करतब और शब्द कीर्तन आदि। 

  • लंगर 
लंगर भी गुरु नानक साहिब जी की ही देन है गुरु सहिब जी ने लंगर प्रथा का आरम्भ किया था और आज भी यह प्रथा सिख समाज में कायम है। आप कोई भी गुरुद्वारा में आज भी चले जाओ और देख सकते है के हर वक़्त गुरुद्वारा में लंगर चल्ता रहता है। इस पवित्र दिन पूरे शहर में लंगर लगाया जाता है। अलग अलग गली मोहल्ले के लोग मिल जल कर लंगर लगवाते है जिस से राहगीरों को बंटवाया जाता है और कोई भी इन्सान इस दिन भूखा नहीं रहता।

  • चहल पहल और सजावट 
इस दिन हर जगह बाज़ार में चहल पहल और सजावट देखने को मिलती है। इसके साथ ही 3 दिन तक तक पंजाब पुलिस की भी जबरदस्त सिक्योरिटी देखने को मिलती है। इस दिन पूरे शहर में जगह जगह RIDES देखने को मिलेगी आप उसका लुतफ उठा सकते है।



जोर मेला कहा मनाया जाता है 

यह मेला पंजाब के शहर बटाला के गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में मनाया जाता है यह गुरुद्वारा बहुत ही इतिहासिक गुरुद्वारा है जो गुरु साहिबान के विआह के नाम से प्रशिद्द है। इस गुरुद्वारा में प्राचीन दीवार आज भी मौजूद है दीवार को पंजाबी भाषा में कंध कहा जाता है इसलिए इस गुरुद्वारा को कंध साहिब कहा जाता है। इस कंध का इतिहास गुरु नानक के शादी वाले दिन से है।  ऐसा माना जाता है की यह दीवार गुरु साहिब की सालिओ ने मजाक में गिराने की कोशिश की और गुरु जी बोलै क यह दीवार युग युगो तक नहीं टूटेगी और ऐसा ही देखने को मिलता है आज भी यह दीवार बिलकुल ही ठीक ठाक इस Gurudwara में मौजूद है।

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